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RETIRED PEOPLE

"रिटायरी   लोग "
*सरकार द्वारा निष्प्रयोज्य यानी "रिटायर" हो जाने के बाद तमाम सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समक्ष  समय काटना एक विकट समस्या बन जाती है।*🤭

इस स्थिति का सामना करने के लिये लोगों ने *तरह-तरह के उपाय और तरीक़ों को ईजा़द किया है।* कुछ कर्मठ ब्रान्ड के लोग तुरंत *रामू काका* के रोल में आ जाते हैं और सबेरे से उठ कर *कंधे पर तौलिया लटका कर घर की साफ़ सफ़ाई और किचेन के ज़रूरी कामों को निबटाने में जुट जाते हैं।*

बचे हुए दिन के समय में यह पत्नियों के लिये *ड्राइवर की सेवायें* मुहैया कराते हैं और बाज़ार में ख़रीदारी और सिनेमा आदि दिखाने का कार्य बख़ूबी निबटाते हैं।

 *ऐसे लोगों की पत्नियों ने पूर्व जन्म में अवश्य कुछ अच्छे कर्म किये होंगे जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें यह सुखद स्थिति प्राप्त हुई है।* 

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रिटायर होने के बाद *एकाएक अत्यधिक धार्मिक* हो जाते हैं ओर सुबह शाम दो-दो घंटे विभिन्न मंदिरों में पूजा पाठ और भजन कीर्तन में अपना टाइम बिता लेते हैं भले ही इसके पहले उन्होंने मंदिरों में कभी झाँका भी न हो और भूल से भी कभी कोई पुण्य का कार्य किया हो। ऐसे लोग इस मनोभाव से ग्रस्त होते हैं कि *उनके द्वारा किये गये सारे दुष्कर्म अब ख़ारिज हो रहे हैं।* 🤪

एक अन्य केटागरी ऐसे रिटायर लोगों की भी है जिनके अंदर रिटायर होने के बाद *अचानक वाल्मीकि और तुलसी की आत्मा* प्रवेश कर जाती है और वे *रातोंरात कवि* बन जाते हैं। यह लोग फ़ेसबुक आदि पर ऐसा *गोबर* फैलाते हैं कि उनके मित्रगण उनके इस *काव्य-प्रदूषण* से परेशान हलकान बने रहते हैं पर *मजबूरी* में *वाह वाह* करने को बाध्य रहते हैं।

कुछ ऐसे भी महानुभाव देखे गये हैं जिनके भीतर *राजनीति का कीड़ा* सदैव कुलबुलाता रहता है और सेवाकाल के दौरान उन्हें यह *भ्रान्ति* हो जाती है कि वह जनता में *बहुत पापुलर हैं* और रिटायर होते ही वह जोड़ तोड़ कर किसी पार्टी में पहुँच जाते हैं और *चुनाव में कूदते ही धड़ाम से चित्त हो जाते हैं।* तब उन्हें बमुश्किल भान होता है कि सेवा के दौरान की *पूछ और इज़्ज़त* उनके पद के कारण *चमचों द्वारा फैलाई नकली आभा थी।* फिर यह किसी पार्टी आफिस के बाहर *लाई चना* खाते हुये अक्सर दिख जाते हैं।

रिटायर बुजुर्गों का एक बडा़ वर्ग उन लोगों का भी है जो परिवार में कदाचित् *पूर्णतया अवांछित* होते हैं और इसी कारण यह घर से बाहर निकलने का एक नायाब तरीक़ा ढूँढ़ लेते हैं। प्रात:दस बजते ही यह *ख़ुद और परिवार की बैंक पास बुकों को इकट्ठा कर किसी न किसी बैंक में घुस जाते हैं और पासबुक की प्रविष्टियाँ कराने में ही दिन का डेढ़ बजा देते हैं* और बैंक के वातानुकूलित माहौल का आनंद लेते रहते हैं। यह लोग बैंक के कस्टमर से अधिक स्टाफ़ ज़्यादा नज़र आते हैं और *बैंक कर्मियों का जीना मुहाल कर देते हैं।*

उपरोक्त सभी श्रेणियों के अलावा भारी संख्या में रिटायरी लोगों की पंसदीदा जगह पड़ोस के पार्क होते हैं जहाँ यह सुबह शाम सैर के बहाने जुटा करते हैं और *सरकार को गरियाने का अपना प्रिय कार्य सम्पन्न करते रहते हैं*, लम्बी-लम्बी हाँक लगाते हैं, यद्यपि इनमें से किसी ने भी *अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में कोई सकारात्मक काम कभी नहीं किया होता है।*

बहुत सारे हमारे रिटायर्ड भाईयों को यह सब काम बिल्कुल रास नहीं आते और *वह घर में ही अपना ज़्यादातर समय बिताना पसंद करते हैं।* ऐसे लोगों के लिये उनके बेटे बहुओं ने बड़ा *उम्दा पासटाईम* तलाश रखा है। वह इन्हें अपने छोटे बच्चे सौंप कर बेफिक्र आफिस, बाज़ार और सिनेमाघर निकल जाते हैं और भाई जी तत्काल *दादा पोज़* अथवा *नाना पोज़* में आ जाते हैं और बच्चों के लिये *अत्यन्त उपयोगी और बहुमूल्य* साबित होते हैं।

जिनके बेटे बेटियाँ कहीं विदेश में हैं वहाँ जाकर भी यह लोग बेहतरीन *बेबी केयर* की सेवायें महीनों तक उपलब्ध कराते हुए कृतार्थ होते हैं।

कुछ ऐसे भी होते हैं जिनके *मुख मंडल* अब भी आज भी *तेजस्व एवं ओज से देदीप्यमान् प्रकाश से चमकते दिखाई देते हैं,* और उनसे उनके अनुभव का लाभ अर्जित करने वालों की भीड़ से घिरे रहते हैं।। जो मान सम्मान और तोहफे से सम्मान देते दिखाई देते हैं।।

कुछ रिटायरी अपने *सेवाकाल के कारनामे* सुनाने बगीचों में *श्रोता* तलाशते फिरते हैं क्योंकि घरवाली तो *ऊब* चुकी होती है और बेटा बहू मोबाईल से ऊपर सिर तक नहीं उठाते।

कुछ रिटायरी *कार्यालयीन फ्री चाय* की तलब बुझाने पास पड़ोस की नुक्कड़ चाय दुकान और पुराने यारों की तलाश में लगे हैं...घर पर शुगर और उमर का वास्ता देकर पाबंदी लग गई है।
🤪🤪🤪🤪🤪🤪

*मुझे आशा है कि आप इस विवरण में खुद को तलाश रहे होंगे?*

*और वह लोग भी पढ़ रहे होंगे जो निकट भविष्य में इस श्रेणी में अपना स्थान ग्रहण करने वाले हैं।*

आशा करते हैं आप अपना सही स्थान चुनेंगे।

मैं *अपने स्थान और कार्यों के चयन हेतु हर पैंतरे अपना रहा।।* देखना है ऊंट किस करवट बैठेगा।।🤪

*सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएँ*

*आप सभी आनंदित रहें।।*
🙏😍🙏


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